नोटबंदी के एक माह में कृषि व्यापार पर प्रतिकूल असर

०९ दिसम्बर २०१६

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इन ३० दिनों में नोटबंदी ने कृषि व्यापार पर काफ़ी प्रतिकूल असर डाला है जिसका प्रभाव किसानों से लेकर मंडी के आड़तियों, मीलों, मजदूरों और रीटेलर्स पर खास प्रभाव देखा गया है |

   किसान: किसानों को फसलों के उपयोग हेतु बीज, खाद और अन्य कृषि लागतों के लिए तथा जिन फसलों की कटाई पूरी हो चुकी है कैश ना होने के कारण उनके मूल्य ना मिल पाना आदि परेशानियों का सामना करना पड़ा है|

  
लघु उद्योग: दाल, गुड़ और तेल मीलें : आवक और अन्य मील प्रक्रियाओं में भारी गिरावट | कुछ ट्रेडर्स का केवल कैश में लेन-देन करना | फिलहाल स्थिति में सुधार देखने को मिला है और इन लोगों ने क्रेडिट कार्ड का उपयोग करना आरम्भ किया है |

  
गुड़ इंडस्ट्री: एशिया की सबसे बड़ी गुड़ मंडी को अत्यधिक नुकसान देखने को मिला है, और अभी ट्रेडिंग में कमी आने से व किसानों को कैश देने में असक्षम रहने से क्रशर्स को कहीं अधिक नुकसान झेलना पड़ा है | जो गुड़ ४००० से ४२०० रुपये प्रति क़ुइण्टल के भाव से चल रहा था वो लुढ़ककर २५०० रुपये प्रति क़ुइण्टल तक पहुँच गया है |

  
ट्रेडर्स अपनी समस्या को लेकर धरना प्रदर्शन के लिए जिले के उच्च अधिकारियों के पास जा रहे हैं व कैसे इस समस्या का निदान हो सके इसके लिए समाधान ढूँढने की प्रक्रिया में लगे हैं |

  
प्याज़: महाराष्ट्र के लसलगाँव में प्याज़ की बोली लगना लगभग बंद हो गया है जिसमें किसानों को सबसे अधिक नुकसान देखने को मिला है |



  
demonetisation


  

संतरे: नागपुर की चंद्रपुर मंडी में आवक में भारी कमी आई है जोकि १३८० टन्स से घटकर ३०० टन्स पर आ गयी है | दूसरे लघु उद्योग की प्रक्रियाओं में जैसे की एलोवेरा जूस, मधु और गुलाब जल के उत्पादक अपने उत्पादों को बेच पाने और कच्चे मालों को खरीद पाने में असक्षम हैं |


   ताजे फल और सब्जियाँ: मुरादाबाद और नजीबाबाद की मंडियों में आवक में भारी गिरावट से ७०% की घटत हुई है | छत्तीसगढ़ में टमाटर को सड़क पर फेंकने की सूचना भी जोरों पर है |


   चावल: भारत के ८०% उत्पादक क्षेत्रों में पंजाब और हरियाणा राज्यों को कहीं अधिक नुकसान का सामना करना पड़ा है जिसका कारण ट्रेडर्स के पास कैश की सुविधा का उपलब्ध ना होना इससे निर्यात में घटत देखी गयी है |


   नोटबंदी के कारण कृषि जगत व्यापार से जुड़े सभी लोगों को काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है और कृषि उत्पादों में भी नुकसान झेलना पड़ा है |



  

  
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